Vedic Plaster

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Organic / Vedic plaster:
जैविक / वैदिक पलस्तर:

We humans need temperature between 20-25°C to live with comfort, but here in India especially in North we have summer for more than 8 months and winter in remaining 4 months. Unfortunately all our present building materials like steel, cement, stone dust and pucca bricks are good conductor of heat, resulting our building absorb heat in summer days and release it at night which is our sleeping time and vice-versa in winter. Our building becomes heated chamber in summers and chilled cave in winters.
हम मनुष्यों को घरों में सहजता से रहने के लिए २० से २५ डिग्री तापमान ही सुहाता है, पर हमारे यहाँ उत्तर भारत में ८ महीने गर्मी व ४ महीने सर्दी रहती है ! दुर्भाग्य से हमारी मौजुदा निर्माण सामग्री जैसे स्टील, सीमेंट, पत्थर की धूल और पक्की ईंट सब के सब गर्मी के अच्छे संवाहक हैं, जिनकी वजह से हमारे घर गर्मियों में दिन में गर्मी को अवशोषित करते हैं व रात्रि में रिहा करते हैं जो कि हमारे सोने का समय होता है ! और सर्दियों में इसके उलट होता है ! सो हमारे घर गर्मियों में गर्म भट्टे व सर्दियों में ठंडी गुफा बन जाते हैं !

Presently we don’t use any thermal insulator in our building. To fill this gap and to correct this error in our modern building materials and technology we are introducing Vedic Plaster, which is gypsum i.e. Calcium Sulphate dihydrate (CaSO4.2H2O) based Cow dung plaster with some good natural additives like guar gum and lemon extract.
अभी तक हम अपने घरों में कोई भी ऊष्मीय विसंवाहक उपयोग नहीं करते हैं ! आधुनिक निर्माण सामग्री व तकनीक में सुधार करते हुए हम लेकर आये हैं वैदिक पलस्तर जो कि कुलनार आधारित गौ गोबर से निर्मित पलस्तर है जिसमें गुआर गम व नीम्बू का सत्व भी अच्छाई बढ़ाने के लिए उपयोग हुआ है !

We all know gypsum and Cow dung are cheaper and best thermal Insulator and human used it in houses from time unknown. Gypsum has been used in pyramids and ancient forts and havelis and has life in thousands years. Vedic Plaster is made for walls and floors without using the conventional method and components. The major breakthrough achieved by Vedic Plaster is replacing cement with Indian breed cow dung. The formula for mixing cow dung and gypsum along with other natural ingredients proved beneficial for the production of plaster.
हमें यह ज्ञात है कि प्राचीनकाल से ही कुलनार व देसी गौ गोबर अच्छे ऊष्मीय विसंवाहक हैं ! कुलनार का उपयोग प्राचीन महलों, मिस्त्र के पिरामिडों व हवेलियों में होता आया है जो की हज़ारों वर्षों तक टिके रह सकते हैं ! वैदिक पलस्तर घर की दीवारों व गृहतल/ फर्श के लिए बनाया गया है, वो भी बिना किसी पारम्परिक रीति व अवयव का प्रयोग करते हुए ! वैदिक पलस्तर में सबसे महत्वपूर्ण खोज यह हुई है कि इसमें सीमेंट को हमने भारतीय गाय के गोबर से बदल दिया है ! कुलनार के साथ गौ गोबर व अन्य प्राकृतिक तत्त्वों को मिलाना पलस्तर के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है !

Method of application of organic/vedic plaster on walls:-
दीवार पर पलस्तर करने की विधि :-

In a tasla/bucket take one part water and two parts vedic plaster. Mix to make a paste/slurry either with hand or with putty mixing machine.
तसले में एक हिस्सा पानी व दो हिस्से वैदिक पलस्तर पाउडर दाल कर अच्छे से लेप बना लें !

First of all wet your wall with water (curing). Then apply 10-12mm thick layer of prepared mixture of vedic plaster on wall with Hand/Iron trowel (patti) or Wooden trowel (fatkadi)/Gurmala just like wall putty or POP. Flatten/smoothen the plaster using trowel creatively. With this you can make designs on ceiling also.
दीवार को पहले अच्छे से भिगो लें फिर पलस्तर के मिश्रण को वॉलपुट्टी या पी.ओ.पी. की तरह गुरमाले, पत्ती, फंट्टी या हाथ से दीवार पर १० से १२ मिलीमीटर की मोटाई तक की परत चढ़ा कर अच्छे से समतल कर लें ! आप इस से छत पे आकृतियाँ/ डिज़ाइन भी बना सकते हैं ! नुणी वाली दीवार पर सीमेंट पलस्तर पहले पूरी तरह से हटाकर उस की जगह पर वैदिक पलस्तर लगा लें !

Note: –
ध्यान दें :

It does not require curing with water; let it dry for few days. Water mixed paste/slurry of vedic plaster must be used within 60-70 minutes.
पलस्तर करने के बाद सीमेंट की तरह यहाँ पानी की तराई की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कुछ दिन सूखने दें ! पानी मिश्रित लेप का ६० से ७० मिनट में ही उपयोग कर लें !

And one kg vedic plaster cover approximately one square foot area.
एक किलो पलस्तर लगभग एक वर्गफुट क्षेत्रफल कवर करता है!

For floor making: – We need to apply one inch thick layer of vedic plaster paste on base gravel bed. And mixture/paste should have 1/3 water and 2/3 plaster.
गृहतल/फर्श बनाने के लिए. रोड़े कूट कर एक इंच मोटा पलस्तर कर लें तथा मिश्रण में पानी की मात्रा एक तिहाई व पलस्तर की मात्रा दो तिहाई रखें !

Benefits:-
लाभ:-

Please consider the tremendous benefits that our plaster delivers:-
वैदिक पलस्तर के अनेकों लाभ आपको मिलेंगे:-

1. Vedic plaster production uses minimal electricity only for grinding purpose compared to cement plaster.
१.सीमेंट की तुलना में वैदिक पलस्तर बनाने के लिए न्यूनतम बिजली का उपयोग हुआ है, केवल पिसाई के लिए !

2. All the factors of production are natural resources; no chemicals are mixed by making it eco-friendly product.
२.इसमें सभी घटक प्राकृतिक हैं, किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग न करते हुए इसे पर्यावरण हितैषी बनाया है !

3. The essence of this product lies in the properties offered by cow dung. The 20-22% of cow dung in an entire mixture contributes immensely to the plaster production. Hence, making it valuable both socially and economically.
३.इस उत्पाद की ख़ास बात यह है कि इसमें २० से २२% गौ गोबर का उपयोग किया गया है ! सो यह सामाजिक व आर्थिक रूप से मूल्यवान है !

4. Another great property is it acts as an air purifier and releases positive energy in the house.
४.यह उत्पाद एक वायु शुद्धक है , जो कि घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है !

5. Thermal insulator, creating a temperature difference of 10-15 degrees. The thermal insulating properties of cow dung plaster have a cooling effect in summers and keep houses warm in winters. Unlike cement plaster which makes homes warmer in summers and cooler in winters.
५.यह ऊष्मीय विसंवाहक है जो कि घर के तापमान में १० से १५ डिग्री का अंतर लाता है ! आपके घर को गर्मियों में ठंडा व सर्दियों में गर्म रखता है ,जैसा सीमेंट कभी नहीं कर सकता !

6. Pollution control measure. It absorbs smoke.
६.यह प्रदूषण को नियंत्रित करता है ! धुएँ को सोख लेता है !

7. The radiation shielding properties make it all the more favourable for the users by protecting them from harmful rays.
७.हानिकारक विकिरण को रोकता है !

8. Good for health.
८.स्वास्थ्य के लिए अति लाभकारी है !

9. Reduces dampness.
९.नमी और नुणी से बचाव होता है !

10. Decline in water consumption as there is no requirement of curing of water after plaster.
१०.पानी की बचत करता है क्योंकि पलस्तर करने के उपरान्त तराई की कोई आवश्यकता नहीं है !

11. The cement plaster involves four stages starting with plastering, wall protection putty, wall smother, i.e., primer and then paint. But Vedic plaster needs only one coat of plaster on walls. To add colour, lime and earthen base natural home paints are used.
११.सीमेंट का पलस्तर चार चरणों में होता है : पलस्तर, वॉलपुट्टी, वॉल स्मूदर(प्राइमर) और फिर पेंट ! लेकिन वैदिक पलस्तर का केवल एक कोट ही काफी है, फिर चाहे आप ऊपर से सीधे प्राकृतिक पेंट कर दें !

12. Indirectly increasing the utility of cows, raising economic value of cows.
१२.परोक्ष रूप से देसी गायों की उपयोगिता बढ़ेगी व गोपालकों को आर्थिक लाभ भी होगा !

13. The other components like gypsum, guar gum, lemons are witnessing an increase in demand due to industrial use. The most significant benefits, in this case, are farmers who are never seeing before like demand for guar gum (Cluster beans).
१३.हमारे द्वारा उपयोग किये जाने से कुलनार, गुआर गम और नीम्बू की मांग बढ़ रही है, जिससे इसका उत्पादन करने वाले व्यक्तियों को लाभ मिल रहा है !

14. Protection against harmful insects.
१४.हानिकारक कीट-पतंगों को पास नहीं आने देता !

15. Economically, the difference of Rs. 13 can be noted to apply plaster on 1 square foot area. The cost-effective cow dung plaster which is way cheaper than the cement plaster is the reason for its success.
१५.आर्थिक रूप से आपको लगभग १३ रूपए प्रति १ वर्ग-फुट क्षेत्रफल पलस्तर करने से होगा ! सीमेंट-बजरी की तुलना में कम खर्च ही वैदिक पलस्तर की सफलता का कारण है !