Natural Paint

HomeNatural Paint

Organic/Natural Lime Based Paints:-
प्राकृतिक चूना आधारित रंग:-

Why paint matters?
हमें पेंट के बारे में क्यों सोचना चाहिए?

Paints, primers, varnishes, stains, sealers and other construction-related materials and products surround us in everyday life. What you put on your walls you inadvertently breathe in for months and years at a time. Even after that paint dries, it continues to off gas a little bit. This means that you continue to inhale and ingest the paint long after you finish the last coat. So also the air you inhale indoor is many times more polluted than outdoor air. What is shocking though is that your interior paint could be at blame. Interior paints are the number one source of indoor pollution today. Why? Because most paints contain chemicals and toxic ingredients that emit harmful compounds year after year home has been painted. What makes matters worse is that they are also extremely energy-intensive to produce.
रंगों, अस्तर,रोगन, स्टेन, सीलरों एवं अन्य निर्माण सम्बन्धी सामग्री ने हमें चारों ओर से घेर रखा है ! आज जो भी आप दीवारों पर लगाएँगे, अनजाने में आप कई महीनों और वर्षों तक उसे सांस के माध्यम से ग्रहण करने वाले हैं ! पेंट के सूखने के बाद भी यह अपनी दुर्घन्ध छोड़ता रहता है, इसका अर्थ यह हुआ कि अंतिम कोट करने के बाद भी यह आपके भीतर सांस द्वारा प्रवेश करता रहता है ! और यह भी सच है कि जो वायु आप घर के भीतर ग्रहण करते हैं वह बाहरी वायु से अधिक प्रदूषित होती है ! चौंकाने वाली बात यह है कि आपका रसायनिक रंग इसका कारण है ! जानते हैं कि क्यों? क्योंकि इन रंगों में ऐसे रसायन व विषैले पदार्थ होते हैं जो कि कई वर्षों तक रंग की हुई दीवारों से हानिकारक योगिक छोड़ते रहते हैं ! एक ओर चिंता का विषय यह है कि इन रंगों के निर्माण में भी गहन ऊर्जा की आवश्यकता होती है !

The chemicals that kill:-
रसायन जो मारते हैं:-

It colours, protects, and textures both in and out of our homes. Unfortunately, it can also contain many ingredients like VOCs (Volatile Organic Compounds), SVOCs (Semi Volatile Organic Compounds), urea formaldehyde, hexavalent chromium, heavy metals, lead and other hazardous chemicals that are bad for our health. Many commercial paints can deteriorate air quality and have adverse effects on cancer cell growth and respiratory function. In addition, chemical-laden paints have abnormally long life cycles, and can leach into shared water sources. The problem with VOC is that they are emitted up to at least 5-10 years after your paint job.
हमारे घरों को भीतर और बाहर से सुन्दर और सुरक्षित रखने के लिए रंगों की आवश्यकता होती है ! परन्तु दुर्भाग्य से इन रंगों में वाष्पशील कार्बनिक योगिक, अर्ध-वाष्पशील कार्बनिक योगिक, यूरिया, विषैली गैसें, षटसंयोजी क्रोमियम, भारी धातुएँ, सीसा धातु एवं दूसरे हानिकारक रसायन होते हैं जो हमारी सेहत के लिए हानिकारक हैं ! कई व्यवसायिक रंग वायु की शुध्धता को बिगाड़ते हैं जो कि कैंसर कोशिका वृद्धि व सांस प्रणाली को प्रभावित करते हैं ! साथ ही रसायन-युक्त रंगों का जीवन चक्र बहुत दीर्घ होता है व ये आस-पास उपयोग किये जाने वाले जल स्त्रोतों में भी रिस जाते हैं ! वाष्पशील कार्बनिक योगिकों के साथ समस्या यह है कि ये रंग करने के ५ से १० वर्षों बाद भी दीवार से निकलते रहते हैं !

The harsh reality about paint:-
रंगों का कटु सत्य:

The truth is, paint is a product of the non-sustainable petrochemical industry and a litre of paint production can yield up to 30 litres of toxic waste.
सच तो यह है कि रंग जो एक अरक्षणीय पेट्रो-रसायन उद्दोग का उत्पाद है, और १ लीटर रंग बनाने में लगभग ३० लीटर विषैला अपशिष्ट बाहर निकलता है !

Fact:-
तथ्य:-

WHO estimates that professional decorators/painters are 40% more likely to contract cancer.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार रंग करने वाले हमारे पेंटर भाइयों में कैंसर होने की ४०% अधिक संभावना होती है !

But not all is lost:-
चिंता न करें हम हैं ना:-

Here we are, the very first of our type, provider of fully organic/eco-friendly/100% VOC free Lime and Earthen Base Natural Home Paints. Doot Natural’s Vedic Paints (To Venetians it is ‘Venetian Plaster’, ‘Stucco and Marmarino’ for the Italians, ‘Tadelakt’ for Morroccons, ‘Shikkui’ for the Japanese, ‘Chunnam’ for South Indians, ‘Araish’ for Rajasthanis and good old ‘Chuna’ for all of us. Lime is known by several names. Few are aware of its tremendous history & potential).
हम आपकी इस समस्या के समाधान के किये ही आये हैं ! हम आपको पूर्णतया जैविक/ पर्यावरण हितैषी / १००% वाष्पशील कार्बनिक योगिक मुक्त/ चूना एवं मिट्टी आधारित प्राकृतिक घरेलु रंग उपलब्ध करवाते हैं ! हमने चूना प्रयोग किया है जिसे वेनिस में वेनिशियन पलस्तर, इटली में सटक्को और मरमारियो, मोरोक्को में टेड़लेक्ट, जापान में शिक्कोई, दक्षिण भारत में चूनम और राजस्थान में आराइश नाम से जानते हैं ! हमसे पहले की पीढ़ी या अभी भी कुछ लोग इसके इतिहास और इसकी क्षमता को पहचानते हैं !

Lime has a proven track record of more than 7,500 years in construction industry. Lime based finishing paints are the flagship products of our company and cornerstone of our offerings. We offer beautiful and highly organic finishing paint solutions that are made with age old recipes. These recipes were used since thousands of years but were lost with the advent of acrylic paints. With modern technology we have harnessed the true potential of this unassuming naturally abundant material. We deliver cutting edge lime based finishing paint solutions for our clients.
चूने का प्रयोग निर्माण उद्दोग में लगभग ७५०० वर्ष पूर्व से होता आया है ! चूना आधारित रंग हमारे संगठन की पहचान हैं, जो हमें सबसे अलग करती है ! प्राचीन विधि का प्रयोग करते हुए हम आपको सुंदरता एवं परिष्करण कार्य हेतु रंग उपलब्ध करवा रहे हैं ! ये विधियाँ समय के साथ व रसायनिक रंगों के प्रयोग के कारण विलुप्त सी हो गईं थी ! आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए हम इस प्राकृतिक रूप से बहुतायात में उपलब्ध चूने का उत्तम प्रयोग कर रहे हैं ! हम अपने ग्राहकों को परिष्करण के लिए उत्तम चूना आधारित रंग उपलब्ध करवा रहे हैं !

The organic composition (Lime, Dung, Jaggery, Fenugreek, Red soil, Yellow soil) makes the paint porous and breathable allowing the air to flow freely between layers. This makes it fairly resistant to dust and issues of dampening with microbial growth reduced as well. You no longer have to endure the typical paint smell for days after newly painting your home. On account of its natural composition these paints emanate a fresh appeal, are odourless (but smell of wet soil), give your walls a rich texture and come with lifelong association/bond. Who can ask for more? Comprised of unique and natural pigments sources from nature, the paints retain these original tones despite external conditions.
इसकी जैविक रचना ( चूना, गोबर, गुड़, मेथी, लाल मिट्टी, पीली मिट्टी ) इस रंग को झरझरा व सांस लेने में सुगम बनाती है, जिससे परतों के मध्य वायु आसानी से बहती है ! इसी गुण के कारण यह रंग धूल के कण, नमी व सूक्ष्मजीवों को दूर रखता है ! आपको बहुत दिनों तक आने वाली नए रंग की दुर्गन्ध से भी मुक्ति मिल जायेगी ! इसकी प्राकृतिक रचना के कारण आपको किसी भी प्रकार की गंध न आते हुए नवीन अनुभव होगा ! आपकी दीवारों को नई बनावट के साथ-साथ लंबा साथ भी मिलेगा ! इससे अधिक और क्या चाहिए , बताइये ? किसी भी बाहरी प्रतिकूलता के कारण ये प्राकृतिक रंग अपना स्वरूप नहीं खोएँगे !

Method of application of organic colour/paint:-
प्राकृतिक रंग करने की विधि:-

The wall should be wet before we proceed for colour/paint. Wet the wall a day before and again wet the wall on actual colouring day. Apply colour/paint with hand, brush, gurmala, or roller as per your choice on wet wall. Second coat of colour is done once first coat is dried. The more hand, brush, gurmala, roller is applied more smoothness/finishing will come.
रंग करने से पहले यह याद रखें कि दीवार नम हो ! रंग करने से एक दिन पहले से ही दीवार की तराई कर दें, व फिर एक बार रंग करने से थोड़ी देर पहले तराई करें ! उसके बाद नम दीवार पे ही आपकी इच्छा अनुसार गुरमाले, ब्रश, रोलर, या हाथ से रंग कर दें ! दूसरी कोट पहली कोट सूखने के बाद करें ! जितना अधिक गुरमाला, ब्रश, रोलर रंग पर चलेगा उतनी ही मज़बूती आएगी !

If you wish to paint old wall then we would suggest you to remove previous colour (acrylic), putty, primer and then apply our natural colours.
पुरानी दीवार रंग करने से पूर्व पहले से किये हुए रसायनिक रंग, पुट्टी, प्राइमर को अच्छी तरह से उतार दें !

Before you start painting, mix the colour of bucket with hand or putty mixing machine.
कृपया रंग करने से पूर्व बाल्टी के रंग को पुट्टी वाली मशीन या हाथ से अच्छे से घोट लें !

If you want to do colour in granny form (bag) then mix 1 kg of powder colour in 300-400 ml water and blend properly. The method of application will be same as in case of paint (bucket).
पटसन बस्ते वाला रंग करने के लिये एक किलो रंग पाउडर में ३०० से ४०० मिलीलीटर पानी डाल कर अच्छे से घोल लें !

Note: –
ध्यान दें:-
5-6 hours after colour/paint, curing with water should be done (best results will come if you use Spray instead of bucket-mug method for curing). Repeat curing process 2-3 more times and that’s it, done! Enjoy healthy indoor forever.
रंग करने से ५ से ६ घंटे बाद हर ३-४ घंटे से ३ से ४ बार रंग की हुई दीवार की पानी से हलकी तराई कर दें ! पानी स्प्रे करना उत्तम रहेगा बजाए पाइप, बाल्टी या मग्गे का प्रयोग करने के ! और लो हो गया ! स्वस्थ प्राकृतिक भीतरी वातावरण में हँसिये-खेलिए !

Benefits:-
लाभ:-

Please consider the tremendous benefits that our paint delivers:-
प्राकृतिक रंग के अनेकों लाभ जानकर आप अचंभित होंगे :

Quality Benefit Scientific reason
Extremely durable Lasts twice as much as acrylic paints if not more Absorbs carbon dioxide from air that turns lime back in to hardened limestone and thus it gains strength as it ages
Bacteria, mould and mildew resistant Walls do not get damaged due to these factors Being alkaline it does not allow the growth of mould, mildew and some bacteria
Extremely breathable Walls do not retain water and become damp The porous nature of lime paint allows easy passage of water vapour
Anti-static It is easier to clean Being antistatic, it does not attract dust
Absorbs moisture Keeps the room dry. Performs very well in damp and sea side applications. Due to its hygroscopic nature it absorbs excess humidity from air thereby balancing moisture in the air.
Purifies air Improves air quality. It is good for people with breathing problems as mentioned above It is hypoallergenic
It is UV safe There is no fading or peeling. It is a mineral which will last for millennia.
It can self-heal the cracks that develop Boosts durability exponentially. This also explains why old structures withstood the test of time. It develops finer cracks. When water penetrates these cracks, it dissolves the free lime and brings it to the surface. As water evaporates, this lime is re-deposited and begins to self-fuse thus healing the cracks
It is natural and eco-friendly The use of limes provide 1-3 LEED( Leadership in Energy and Environmental Design) credits It has no volatile organic compound (VOC). It absorbs carbon dioxide
गुण लाभ वैज्ञानिक कारण
अत्यंत टिकाऊ रासायनिक रंगों से दोगुने से भी अधिक टिकाऊ जैसे-जैसे समय व्यतीत होता है यह और अधिक मज़बूत होता है ! वायु से CO2 सोखकर चूना पत्थर में परिवर्तित हो जाता है !
जीवाणु व फफूंदी रोधी इनसे दीवारें क्षतिग्रस्त नहीं होती हैं ! क्षारीय होने के कारण यह रंग जीवाणु और फफूंदी को पनपने नहीं देता है !
साँसों के लिए अत्यंत सुगम दीवारों में नमी व पानी रुकने की समस्या नहीं होती है ! चूने के झरझरा होने के नाते यह रंग नम वायु को आसानी से अपने भीतर प्रवाहित होने देता है !
स्थिर-विरोधी इसकी आसानी से सफाई की जा सकती है ! स्थिर-विरोधी होने के कारण यह धूल के कणों को आकर्षित नहीं करता है !
आर्द्राग्राही (नमी सोखने वाला) कक्ष को सूखा रखता है ! नमी व समुद्र के निकट के स्थानों के लिए भी उत्तम आर्द्राग्राही प्रकृति होने के कारण यह उत्पाद अत्यधिक नमी को सोखकर वायु में नमी के संतुलन को बनाये रखता है !
वायु-शुद्धक वायु की गुणवत्ता बढ़ाता है ! यह सांस सम्बन्धी विकारों वाले मनुष्यों के लिए अच्छा है ! कोई एलर्जी (प्रत्यूर्जता) नहीं करता
पराबैंगनी किरणों से बचाता है ! न छिलेगा और न ही फीका पड़ेगा चूना एक ऐसा खनिज है जो कई सदियों तक टिकता है !
दरारों को स्वयं ठीक कर लेता है ! चरघातांकी रूप से स्थायित्व बढ़ाता है ! यह सिद्ध करता है कि कैसे प्राचीन निर्माण आज भी खड़े हैं ! दीवार के छोटे-छोटे छिद्रों में जब जल प्रवेश करता है , तो जल मुक्त चूने के साथ घुलकर सतह पर आ जाता है ! और जब जल भाप बनकर उड़ जाता है तो यह चूना वापस से छिद्रों में मिल जाता है, और इस प्रकार स्वयं ही छिद्रों को ठीक कर लेता है !
पूर्ण प्राकृतिक व पर्यावरण हितैषी चूने का प्रयोग १ से ३ लीड(LEED ) का श्रेय देता है ! (यह एक संस्था है जो हरित भवनों की रेटिंग देती है ) इस रंग में शून्य वाष्पशील कार्बनिक योगिक हैं ! यह CO2 को सोख लेता है !